प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने विधान सभा स्थित सभागार कक्ष में विभागीय अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान मंत्री ने जनहित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए योजनाओं के विस्तार और पेंशन राशि में वृद्धि हेतु प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
पेंशन योजनाओं में भारी बढ़ोतरी का निर्णय
मंत्री खजान दास ने पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों को बड़ी राहत देते हुए निम्नलिखित घोषणाएं कीं
विधवा एवं दिव्यांग पेंशन: वर्तमान 1500 रुपये से 25% बढ़ाकर 1875 रुपये कर दी गई है।
बौना एवं तीलू रौतेली पेंशन: 1200 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये करने हेतु प्रस्ताव के निर्देश।
दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान: 700 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये किया जाएगा।
आय सीमा में वृद्धि: पेंशन एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए पात्रता आय सीमा को 4000 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये करने का निर्णय लिया गया है।
शिक्षा और छात्रावास प्रबंधन
छात्रवृत्ति योजनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए मंत्री ने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया में कोई भी त्रुटि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि:
मसूरी गर्ल्स इंटर कॉलेज के छात्रावास का पुनर्निर्माण 3 माह में पूर्ण कर सितंबर 2026 तक संचालन शुरू किया जाए।
राजकीय औद्योगिक आस्थानों में नए ट्रेड शुरू हों और अनुभवी शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।
प्रदेश में संचालित 14 डॉ. बी.आर. अम्बेडकर अनुसूचित जाति छात्रावासों की व्यवस्था सुदृढ़ की जाए।
सामाजिक एवं ढांचागत सुधार
इंटरकास्ट मैरिज सहायता: सामान्य जाति की विधवा एवं एससी-एसटी परिवारों को दी जाने वाली सहायता की समयसीमा अब वित्तीय वर्ष के बजाय 365 दिन (Date to Date) मानी जाएगी।
आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को व्हीलचेयर, छड़ी और चश्मा जैसे उपकरण वितरित करने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए।
आदर्श ग्राम योजना: प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के तहत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि विभाग के कर्मचारी आपसी समन्वय और पूरी जिम्मेदारी से कार्य करें। उन्होंने ‘स्माइल परियोजना’, ‘शिल्पी ग्राम’ और ‘नमस्ते योजना’ का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक समान रूप से पहुँचाने के निर्देश दिए। साथ ही, एससी-एसटी बाहुल्य क्षेत्रों के लिए 13 जनपदों के आधार पर विशेष कार्ययोजना बनाने को कहा।
बैठक के अंत में उन्होंने जोर दिया कि सभी कार्य गुणवत्तापरक हों और ससमय पूर्ण किए जाएं ताकि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके।