spot_img
Home Blog

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चारधाम यात्रा मार्गों पर मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ खाघ विभाग का अभियान जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चारधाम यात्रा मार्गों पर मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ खाघ विभाग का अभियान जारी

खाघ विभाग ने 325 दुकानों का किया निरीक्षण, 155 सैम्पल जांच को भेजे, 6 मिलावटखोरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, 03 अन्य के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी

बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा मार्ग पर मोबाइल टेस्टिंग वैन से जांचे 500 सैंपल, गंगोत्री-यमुनोत्री में भी मोबाइल वैन चलाने की तैयारी

आम जनता के लिए ट्रोल फ्री नंबर 180018042 जारी, खाघ विभाग ने कार्बाइड युक्त फलों को लेकर भी शुरू किया अभियान, फलों के नमूने एकत्र कर उन्हें आवश्यक जांच के लिए भेजा

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले ही खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मिलावटी खाद्य पदार्थों को लेकर विशेष अभियान शुरू कर दिया गया था। यह अभियान वर्तमान में भी लगातार जारी है। उपायुक्त गढ़वाल मंडल राजेन्द्र सिंह रावत के नेतृत्व में टीमों का गठन कर यात्रा मार्गों पर होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में बेची जा रही खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच की जा रही है। इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ. आर. राजेश कुमार की ओर से अधिकारियों को कड़े निर्देश दिये गये हैं कि कि अभियान में लापरवाही बिल्कुल भी बर्दाश नहीं की जायेगी। आयुक्त के स्पष्ट निर्देश हैं कि चारधाम यात्रा मार्ग पर कोई भी दुकानदार मिलावटी सामान, खाद्य पदार्थ व फलों को नहीं बेच पाये इसका विशेष ध्यान रखा जाये। डॉ आर राजेश कुमार द्वारा उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली जिले में अभियान चलाने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

325 दुकानों का निरीक्षण, 155 नमूने जांच को भेजे गये
अपर आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि आयुक्त डॉ आर राजेश कुमार के निर्देशों के अनुक्रम में उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। चारधाम यात्रा मार्गों पर मिलावटी खाद्य पदार्थों पर खास निगरानी रखी जा रही है। मिलावटी या एक्सपायरी डेट के खाद्य सामग्री बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उपायुक्त गढ़वाल मंडल राजेन्द्र सिंह रावत के नेतृत्व में खाद्य विभाग की टीम अब तक 325 दुकानों का निरीक्षण कर चुकी है। इसमें 155 नमूने संदिग्ध पाये गये जिनको जांच के लिए लैब में भेजा गया है। जांच रिपोर्ट मानको के अनुरूप नहीं आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी। अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि अभी तक हमने मिलावटी सामान व खाद्य पदार्थ बेचने वाले 6 दुकानदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया है। 03 अन्य दुकानदारों के खिलाफ भी मिलावटी सामान बेचने में कार्रवाई गतिमान है। आम जनमानस के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जायेगा। उन्होंने बताया कि पिछले साल भी चारधाम यात्रा के दौरान विभाग ने अभियान चलाया था।

मोबाइल टेस्टिंग वैन से लिये गये 500 सैंपल
अपर आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि मोबाइल टेस्टिंग वैन की टीम ने पूरे यात्रा मार्ग पर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों के साथ खाद्य पदार्थ की दुकानों का निरीक्षण कर नमूनों की जांच की। इस दौरान 500 से अधिक सैंपल लिये गये। इनमें किसी भी सैंपल में कोई मिलावट नहीं पाई गई। अपर आयुक्त ने बताया कि अभी मोबाइल टेस्टिंग वैन बद्रीनाथ-केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सैंपलों के जांच के लिए लगाई गई है। जल्द मोबाइल टेस्टिंग वैन को गंगोत्री-युमनोत्री यात्रा मार्ग पर भी सैंपलों की जांच के लिए भेजा जायेगा। अपर आयुक्त ने बताया कि मोबाइल वैन में नमूनों की जांच के लिए एक डिप्टी कमिशनर व एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी तैनात रहता है।

आईइसी के साथ मिलकर चलाया जागरूकता अभियान
अपर आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले ही विभाग द्वारा आईइसी के साथ मिलकर मिलावटी खाद्य पदार्थों को लेकर जनजागरूकता अभियान शुरू कर दिया गया था। स्थानीय व्यापारियों, ढाबा संचालकों, फल विक्रेताओं मेडिकल स्टोर संचालकों के साथ बैठकें कर पूरी गाइडलाइन से अवगत कराया गया। जिसके बाद काफी परिवर्तन यात्रा मार्गों पर देखने को मिल रहा है।

आम जनता के लिए ट्रोल फ्री नंबर
अपर आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि आम जनता के लिए भी ट्रोल फ्री नंबर 180018042 जारी किया गया है। किसी भी व्यकित को किसी भी प्रकार के मिलावट या एक्सपायरी सामान बेचे जाने की जानकारी मिलती है तो वह ट्रेाल फ्री नम्बर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।

मिलावटी फलों को लेकर अभियान
अपर आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि आयुक्त डॉ आर० राजेश कुमार के निर्देशानुसार प्रतिबंधित कैल्शियम कार्बाइड युक्त फलों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया गया है। हमने विभिन्न फलों के नमूने एकत्र कर उन्हें आवश्यक जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है। अपर आयुक्त ने बताया कि फलांे को कार्बाेइड से पकाने तथा कलर करने की शिकायत मिलने पर गढ़वाल आयुक्त एफडीए डॉ आर एस रावत के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम द्वारा निरंजनपुर सब्जी मण्डी, नेहरु कौलोनी सब्जी मंडी, आराघर सब्जी मंडी तथा 6 नम्बर पुलिया सब्जी मण्डी का औचक निरीक्षण किया गया। टीम के द्वारा तरबूज, खरबूज, पतीता, आम, केला के 9 नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गये हैं। फलों जैसे आम, केले, पपीता आदि को पकाने हेतु प्रतिबंधित कार्बाेइड का प्रयोग करते नहीं पाया गया। मौके पर फलों को पकाने हेतु ऐथेलीन का प्रयोग करते पाया गया। फलो को सेथेलीन से पकाने हेतु भारतीय खाद्य सुरखा एवं मानक प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा प्रमाणीकरण किया गया है। फलो में विशेषकर तरबूज, खरबूज आदि में कलर करते नहीं पाया गया। टीम में अभिहित अधिकारी मुख्यालय मनीष समाना, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी दे०झ रमेश सिंह, मंडी उप निरीक्षण आदि थे। अपर आयुक्त ने बताया कि मिलावटी फलों को लेकर यह अभियान यात्रा मार्गों के साथ पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है।

विकासनगर/चकराता में नष्ट कराया गया एक्सपायरी डेट का सामान
अपर आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि उपायुक्त मुख्यालय जी०सी० कण्डवाल के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम द्वारा यात्रा मार्ग व पर्यटन स्थलों में अभियान चलाया जा रहा है। जनपद देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में यह अभियान जारी है। टीम द्वारा खाद्य पदार्थों के थोक विक्रेताओं, होटल, रेस्टोरेंट, रिजोर्ट आदि प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता तथा किचन, स्टोर का निरीक्षण किया गया। विकासनगर के बरोटीवाला, लांधा रोड़ में स्थित खाद्य निमाताओं/ फुटकर विक्रेताओं का खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 के प्राविधानों के अन्तर्गत निरीक्षण किया गया। संयुक्त टीम द्वारा खाद्य तेल निर्माण ईकाई का भी औचक निरीक्षण कर लाइसेंस, लेबलिंग कंडिशन व भंडारण की जाँच की गई। साथ ही खास आपूर्ति कर रहे वाहनों को भी जांचा गया। इसके बाद टीम द्वारा हरिपुर, कालसी बाजार में आधा दर्जन प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। कालसी स्थित डेली नीड्स स्टोर में एक्सपायरी डेट के मसालों, शीतल पेय के लगभग 50 पैकेट व बोतल को मौके पर नष्ट करवाया गया। साथ ही खाद्य कारोबारी को चेतावनी दी गई। टीम द्वारा पर्यटक सीजन के दृष्टिगत पोरवा में लगभग आधा दर्जन रिर्जाट एंव होटल रेस्टोरेंट का निरीक्षण किया गया। कुछ जगहों पर खाद्य लाइसेंस नहीं पाया गया व किचन में साफ सफाई व्यवस्था नहीं पायी गई। जिसके लिए 04 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किये गये। टीम द्वारा चकराता बाजार में होलसेल/फुटकर वैर्कस/ रेस्टोरेंट आदि निरीक्षण किया गया। तथा 02 प्रतिष्ठान) से वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय तिवारी द्वारा 02 नमुने जांच हेतु लिए गये। जिसे जाँच हेतु राजकीय प्रयोगशाला रुद्रपुर भेजा गया। रिपोर्ट आने के पश्चात दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जायेगी। अभियान के दौरान होटल, रेस्टोरेंट संचालकों को खुले खाद्य सामग्री विशेषतः, पनीर, मसाले व खाद्य तेल प्रयोग में न लाये जाने व खाद्य सामाग्री के निर्माण में गुणवत्ता परख खाद्य सामाग्री लाने के सख्त निर्देश दिये गये। कार्यवाही टीम में उपायुक्त खाद्य मुख्यालय जीसी कण्डवाल, बरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी, विकासनगर/चकराता संजय तिवारी एफडीए विजिलेंस से योगेन्द्र सिंह नेगी एंव संजय नेगी मौजूद रहे। उक्त अभियान आगे भी जारी रहेगा।

आयुर्वेद विवि में कुलपति अरुण त्रिपाठी के चयन को लेकर सुलगे सवाल!

उत्ताराखंड आयुर्वेद विवि में बिना शिक्षा के कुलपति बनने का सुनहरा मौका !

उत्तरखण्ड आयुर्वेद विवि में फर्जी कुलपतियों अड्डा- कुछ सुलगते सवाल !

आयुर्वेद विवि में कुलपति अरुण त्रिपाठी के चयन को लेकर सुलगे सवाल

उत्तराखण्ड आयुर्वेद विवि में कुलपति के चयन का जिन्न फिर बाहर निकला

राज्यपाल को सम्बोधित शिकायती पत्र में कुलपति पद की योग्यता समेत कई अन्य गड़बड़ तथ्यों का उल्लेख

देहरादून। उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कुलपति पद की चयन प्रक्रिया में हुए भ्रष्टाचार के बाबत राज्यपाल से शिकायत की गई। शिकायती पत्र में आयुर्वेद विवि में छह महीने पूर्व नियुक्त किये हुए कुलपति डॉ अरुण त्रिपाठी की नियुक्ति को गलत बताते हुए इसे भ्र्ष्टाचार का मामला करार दिया गया।

शिकायती पत्र में कहा गया कि अरुण कुमार त्रिपाठी का प्रोफेसर पद पर 10 वर्ष का अनुभव पूर्ण नहीं है। और उन्होंने कई गलत जानकारी दे कर गुमराह किया।

पत्र में शासन की ओर से डॉ अरुण त्रिपाठी को जारी अनुभव प्रमाण पत्र पर भी उंगली उठाई गई है। कहा गया कि अनुभव प्रमाण पत्र विवि की ओर से जारी होना चाहिए था।

अमित गोदियाल की तरफ से दिए गए शिकायती पत्र में सर्च कमेटी को कठघरेमें खड़ा करते हुए सूचना के जनअधिकार से मिले दस्तावेजों को संलग्न किया गया है।

गौरतलब है कि नवंबर 2023 में डॉ अरुण त्रिपाठी की उत्तराखण्ड आयुर्वेद विवि में कुलपति पद लर नियुक्ति हुईथी। इस शिकायती पत्र के बाद कुलपति की नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

नियुक्ति के छह महीने बाद की गई शिकायत पर कुलपति डॉ अरुण त्रिपाठी का लिखित में जवाब मिलने पर “ब्यूरो आइडिया फॉर न्यूज़ ” में अवश्य प्रकाशित किया जाएगा।

उत्तराखंडशिक्षा
आयुर्वेद विवि में कुलपति अरुण त्रिपाठी के चयन को लेकर सुलगे सवाल
29/05/2024 अविकल थपलियाल
उत्तराखण्ड आयुर्वेद विवि में कुलपति के चयन का जिन्न फिर बाहर निकला

राज्यपाल को सम्बोधित शिकायती पत्र में कुलपति पद की योग्यता समेत कई अन्य गड़बड़ तथ्यों का उल्लेख

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कुलपति पद की चयन प्रक्रिया में हुए भ्रष्टाचार के बाबत राज्यपाल से शिकायत की गई। शिकायती पत्र में आयुर्वेद विवि में छह महीने पूर्व नियुक्त किये हुए कुलपति डॉ अरुण त्रिपाठी की नियुक्ति को गलत बताते हुए इसे भ्र्ष्टाचार का मामला करार दिया गया।

शिकायती पत्र में कहा गया कि अरुण कुमार त्रिपाठी का प्रोफेसर पद पर 10 वर्ष का अनुभव पूर्ण नहीं है। और उन्होंने कई गलत जानकारी दे कर गुमराह किया।

पत्र में शासन की ओर से डॉ अरुण त्रिपाठी को जारी अनुभव प्रमाण पत्र पर भी उंगली उठाई गई है। कहा गया कि अनुभव प्रमाण पत्र विवि की ओर से जारी होना चाहिए था।

अमित गोदियाल की तरफ से दिए गए शिकायती पत्र में सर्च कमेटी को कठघरेमें खड़ा करते हुए सूचना के जनअधिकार से मिले दस्तावेजों को संलग्न किया गया है।

गौरतलब है कि नवंबर 2023 में डॉ अरुण त्रिपाठी की उत्तराखण्ड आयुर्वेद विवि में कुलपति पद लर नियुक्ति हुईथी। इस शिकायती पत्र के बाद कुलपति की नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

नियुक्ति के छह महीने बाद की गई शिकायत पर कुलपति डॉ अरुण त्रिपाठी का लिखित में जवाब मिलने पर “अविकल उत्तराखण्ड” में अवश्य प्रकाशित किया जाएगा।

मा० राज्यपाल / कुलाधिपति जी, उत्तराखंड राजभवन,
न्यू कैंट रोड,
देहरादून- 248003
विषय : उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कुलपति पद की चयन प्रक्रिया में हुए भ्रष्टाचार की शिकायत के सम्बन्ध में।
आदरणीय महोदय,
उपरोक्त विषयक आपके सादर संज्ञान में यह ताना है कि- उत्तराखंड शासन के आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग द्वारा गत वर्ष-2023 में उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कुलपति के रिक्त पद पर चयन हेतु समाचार पत्रों के माध्यम से दिनांक- 19.04.2023 को विज्ञापन प्रकाशित किया गया था। उक्त चयन प्रक्रिया हेतु गठित की गयी सर्च कमेटी (Search Committee) सदस्यों द्वारा स्थापित नियमों के विरुद्ध जाकर चयन प्रक्रिया संबंधित कार्यवाही की गयी है तथा अयोग्य अभियर्थी की नियुक्ति किये जाने हेतु आपको (कुलाधिपति) को संस्तुति की गयी। इस चयन प्रक्रिया में वस्तुनिष्ठता (Objectivity) और पारदर्शिता (Transparency) के साथ-साथ निष्पक्षता (Impartiality) जैसे मूल्यों पर भी समझौता किया गया है।
विश्वविद्यालय के लिए कुलपति (Vice Chancellor) का पद सम्मानित होने के साथ ही सर्वोच्च महत्ता का पद भी होता है। विश्वविद्यालय के लिए समस्त शिक्षा व अनुसंधान से संबंधित महतवपूर्ण नीतिगत विषयों एवं समस्त वित्तीय निर्णय कुलपति में अधीन ही लिए जाते है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद्, शैक्षणिक समिति व वित्त समिति जैसे सर्वोच्च निकायों का अध्यक्ष होने के तौर पर विश्वविद्यालय की विकास की दिशा एवं दशा भी कुलपति के द्वारा लिए गए निर्णयों पर ही निर्भर करती है। अगर इस महत्वपूर्ण पद के लिए योग्यता को लेकर समझौता होगा तो उस विश्वविद्यालय का भविष्य अंधकार में ही होगा।
वर्तमान में शासन द्वारा उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कुलपति पद पर ड्रा० अरुण कुमार त्रिपाठी का चयन किये जाने से भी ऐसा ही
हुआ है। यद्यपि विश्वविद्यालय में कुलपति पद के लिए आवश्यक अर्हता (qualifications) के दृष्टिगत अभ्यर्थी डा० अरुण कुमार त्रिपाठी अयोग्य था, फिर भी सर्च कमेटी (Search Committee) ने डा० अरुण कुमार त्रिपाठी के नाम पर संस्तुति प्रदान की है। सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत
सरकार के आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग से मिली जानकारी एवं दस्तावेजों में से अनेकों तथ्य सामने आये है जो निम्नलिखित है-
1. सक्षम अधिकारी से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) प्राप्त नहीं किया जाना।
2. डा० अरुण कुमार त्रिपाठी का प्रोफेसर पद पर 10 वर्ष का अनुभव पूर्ण नहीं होना।
3. डा० अरुण कुमार त्रिपाठी द्वारा आवेदन पत्र में त्रुटियाँ करते हुए शिक्षण अनुभव की कुल अवधि की गलत जानकारी एवं फर्जी शिक्षण अनुभव दर्शाना।
4. डा० त्रिपाठी द्वारा ‘प्राचार्य पद पर मौलिक / नियमित रूप में नियुक्त होने के बाद भी अपने आप को कार्यवाहक रूप में दर्शाना।
5. डा० त्रिपाठी द्वारा आवेदन पत्र में वर्तमान में ‘प्राचार्य’ पद पर मौलिक नियुक्ति दिनांक की गलत जानकारी देना।
6. डा० अरुण कुमार त्रिपाठी द्वारा आवेदन पत्र में एक समय में अलग-अलग शहरों (जालंधर व वाराणसी) के विश्वविद्यालयों में पी०एच०डी० डिग्री कोर्स एवं नौकरी करते हुए एक साथ ही दर्शाना।
7. डा० अरुण कुमार त्रिपाठी द्वारा स्वहस्ताक्षरित कूटरचित फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र तैयार करना तथा आवेदन की तिथि समाप्त हो जाने के बाद उन्हें आवेदन में प्रस्तुत करना।
8. सर्च समिति के सदस्य-सचिव, डा० पंकज कुमार पांडेय (IAS) द्वारा विशेष अभ्यर्थी डा० अरुण कुमार त्रिपाठी का पक्ष लेना, विज्ञापन की शर्त के विरुद्ध जाकर आवेदन की समय-समाप्ति के बाद भी देरी से जमा किये गए दस्तावेजों वाले एवं त्रुटिपूर्ण भरे आवेदनों को निरस्त करने की जगह उन पर विचार करना, एवं डा० अरुण कुमार त्रिपाठी के तथ्यों व फर्जी प्रमाण-पत्रों को जानबूझकर नजरअंदाज करना।
दरअसल इस चयन मामले में एक प्रकार का षड्यंत्र हुआ है जो उच्च स्तरीय अधिकारियों के द्वारा स्वार्थपरता व पक्षपात भावना के साथ डा० त्रिपाठी के निजी हित में किया गया है। इस चयन प्रक्रिया में नियमों व तथ्यों की खुली अनदेखी हुई है। इस पत्र सारा मामला स्पष्ट हो रहा है जो उपरोक्त बिंदु विस्तारपूर्वक एवं साक्ष्य सहित निम्न प्रकार है-
सहित संलग्न किये गए समस्या साक्ष्यों से

किसी भी सरकारी सेवक के लिए विभाग या संस्थान में अपने मूल पद पर कार्य करते हुए किसी अन्य पद पर आवेदन करने से पूर्व नियमानुसार उस संस्थान के सक्षम प्राधिकारी से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (No Objection Certificate) प्राप्त किया जाना आवश्यक होता है। ऐसा नहीं किया जाना नियमों का सीधा- सीधा उल्लंघन है। डा० अरुण कुमार त्रिपाठी की मौलिक (substantive appointment) नियुक्ति प्राचार्य (PRINCIPAL) के पद पर है तथा वर्तमान में वह उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के हरिद्वार स्थित परिसर में कार्यरत है। क्योंकि डा० अरुण कुमार त्रिपाठी मूल रूप से आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कार्मिक है इसलिए तत्समय में उन्हें NOC प्रदान किये जाने के लिए सक्षम प्राधिकारी (competent authority) विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो० सुनील कुमार जोशी थे। लेकिन डा० त्रिपाठी ने कुलपति पद पर आवेदन करने के लिए अपने मूल विभाग के सक्षम प्राधिकारी से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त नहीं किया था।
वास्तव में डा० अरुण कुमार त्रिपाठी ने कभी भी NOC के लिए विश्वविद्यालय में आवेदन ही नहीं दिया और उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की तरफ से डा० त्रिपाठी को कोई NOC प्रदान नहीं की गयी थी। डा० त्रिपाठी द्वारा केवल शासन के आयुष विभाग से अपने अतिरिक्त प्रभार (कार्यवाहक निदेशक, आयुर्वेद एवं यूनानी सेवाएं) के रूप में NOC मांगी गयी थी। लेकिन डा० अरुण कुमार त्रिपाठी का मूल नियोक्ता विश्वविद्यालय है। इसलिए शासन का आयुष विभाग अभ्यर्थी डा० अरुण कुमार त्रिपाठी को उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में प्राचार्य पद पर मूल रूप से नियुक्त होने के कारण NOC जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं था।
अतः डा० अरुण कुमार त्रिपाठी का मूल विभाग ‘उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय है तथा अपने मूल विभाग के सक्षम प्राधिकारी से NOC प्राप्त किये बिना ही किसी अन्य नये पद पर आवेदन करना एवं नियुक्ति प्राप्त किये जाना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। इस प्रकार कुलाधिपति/राज्यपाल द्वारा भी ऐसे अभ्यर्थी की नियुक्ति किया जाना नियम विरुद्ध है।
(संलग्न साक्ष्य-01)
2. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) के नियमों एवं उत्तराखंड शासन के आयुष विभाग दिनांक- 19.04.2023 को प्रकाशित विज्ञापन (advertisement) के अनुसार कुलपति पद पर आवेदन करने के लिए अभ्यर्थी को किसी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद पर 10 वर्ष का शिक्षण अनुभव होना अनिवार्य है। लेकिन डा० त्रिपाठी का प्रोफेसर पद पर अनुभव केवल 04 वर्ष 08 माह (दिनांक- 17.02.2009 से 07.11.2013 तक) का ही है। उन्हें विश्वविद्यालय में दिनांक 08.11.2013 के बाद से कभी भी ‘प्रोफेसर’ के पद पर औपचारिक रूप से नियुक्त या नियोजित नहीं किया गया है।
इस कारण से डा० अरुण कुमार त्रिपाठी द्वारा अपने स्तर से ही एक स्वहस्ताक्षरित फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र (forged certificate) तैयार किया गया तथा बाद में आवेदन की तारीख समाप्त हो जाने के बाद पड़यंत्र के तहत बाकी दस्तावेजों के साथ जमा किया। डा० त्रिपाठी द्वारा अपने आवेदन पत्र के साथ दिनांक 08.11.2013 से 05.05.2023 तक की अवधि के दौरान का ‘प्रोफेसर’ पद के सापेक्ष शिक्षण कार्य किये जाने का कोई भी ऐसा अनुभव प्रमाण-पत्र संलग्न नहीं किया गया है, जिसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित व सत्यापित किया गया हो।
असल में वास्तविक तथ्य यह है कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग हरिद्वार द्वारा दिनांक 08.11.2013 को डा० अरुण कुमार त्रिपाठी की मौलिक नियुक्ति प्राचार्य’ (PRINCIPAL) पद पर की गई थी। वह दिनांक 08.11.2013 से वर्तमान तक आज भी मूल रूप में ‘प्राचार्य’ (PRINCIPAL) पद के सापेक्ष ही नियुक्त है। यह प्राचार्य का पद एक प्रशासनिक संवर्ग का पद है तथा प्रोफेसर की तरह किसी शिक्षण संवर्ग का पद नहीं है। इसके बावजूद भी डा० अरुण कुमार त्रिपाठी द्वारा स्वयं को अपने आवेदन पत्र में विभिन्न कॉलम में प्रोफेसर (शिक्षक) पद पर कार्य करते हुए दर्शाया गया है। यह भ्रामक करने वाली जानकारी सीधे तौर पर धोखाधड़ी है। डा० त्रिपाठी द्वारा अपने आवेदन पत्र में दी गयी जानकारी को लेकर शपथ-पत्र (Affidavit) भी जमा किया गया है। जिस कारण वह शपथ लेने के बावजूद भी झूठा शपथ पत्र, जाली प्रमाण-पत्र एवं गलत जानकारी देने में IPC के तहत विभिन्न धाराओं में आरोपी भी बन रहे है।
इससे आश्चर्य की बात यह है कि सर्च कमेटी (search Committee) सदस्यों द्वारा आवेदन संबंधित दस्तावेजों का गहन विश्लेषण किये जाने के दौरान भी इसकी पुष्टि नहीं की गयी तथा इस बात को पड़यंत्र के तहत दबा दिया गया था। बल्कि इसके विपरीत जाकर सर्च समिति ने डा० अरुण कुमार त्रिपाठी का प्रोफेसर पद पर कार्य किये जाने का 14 वर्ष 02 माह के अनुभव माना गया है। लेकिन वास्तव में डा० त्रिपाठी का प्रोफेसर पद पर अनुभव केवल 04 वर्ष 08 माह (दिनांक- 17.02.2009 से 07.11.2013) तक ही का है जो किसी भी प्रकार से कुलपति पद की अर्हता के सापेक्ष पर्याप्त
नहीं है।। इसलिए डा० अरुण कुमार त्रिपाठी कुलपति पद पर चयन किये जाने हेतु योग्यता नहीं रखते है। डा० अरुण कुमार त्रिपाठी द्वारा आवेदन पत्र में दी गई कई जानकारियां गलत एवं भ्रामक करने वाली हैं। डा० त्रिपाठी द्वारा विभिन्न दस्तावेजों 3.
(संलग्न साक्ष्य-02)
में (i.e. Application Form, Teaching Experience Certificate & curriculum-vitae) अपने प्रोफेसर (Professor) पद पर शिक्षण अनुभव की कुल अवधि को को अलग-अलग दर्शाया है, जिसमें विरोधाभास उत्पन्न हो रहा है। उक्त समस्त भ्रामक करने वाले दस्तावेजो को डा० अरुण कुमार त्रिपाठी द्वारा स्वहस्ताक्षरित (self-signed) कर सत्यापित किया गया जो तालिका-01 में है-
देखें, शासन का अनुभव प्रमाण पत्र

उत्तराखण्ड शासन • आयुष एवं आयुष शिक्षा अनुभाग संख्याः 5८८/XL-1/2023-149/2010 देहरादूनः दिनांक 8 मई, 2023 अनुभव प्रमाण पत्र
प्रमाणित किया जाता है कि डॉ० अरुण कुमार त्रिपाठी पुत्र श्री उमा नाथ त्रिपाठी द्वारा आयुष एवं आयुष शिक्षा विभागान्तर्गत सौंपे गये निम्नवत कार्यों / दायित्वों का निर्वहन किया गयाः-
दिनांक 31.01.2012 से 07.11.2013 तक कार्यवाहक प्राचार्य के रूप में तथा से लोक सेवा आयोग से चयनोपरान्त प्राचार्य के रूप में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार तथा ऋषिकुल राजकीय आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय नियमित रूप से निरन्तर निर्वहन किया गया।
दिनांक 08.11.2013 राजकीय आयुर्वेदिक हरिद्वार के कार्यों का
दिनांक 24.07.2014 से दिनांक 11.07.2019 तक प्राचार्य, ऋषिकुल राजकीय आयुर्वेदिक कालेज हरिद्वार के पद पर बने रहते हुए निर्देशक आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं उत्तराखण्ड के पद के अतिरिक्त कार्य का निर्वहन किया गया।
दिनांक 30.03.2017 से 16.06.2017 तक कुल सचिव, उत्तराखण्ड आयुर्वेद पर बने रहते हुए निदेशक, आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं उत्तराखण्ड निर्वहन किया गया।
विश्वविद्यालय के पद के पद के कार्यों का
दिनांक 17.06.2017 से दिनांक 16.12.2017 तक कार्यवाहक कुलपति, विश्वविद्यालय, हर्रावाला, देहरादून के कार्यों के साथ-साथ निदेशक सेवायें के पद के कार्यों का निवर्हन किया गया।
उत्तराखण्ड आयुर्वेद आयुर्वेदिक एवं यूनानी
दिनांक 13.03.2020 से दिनांक 17.07.2020 तक प्राचार्य गुरुकुल/निदेशक परिसर गुरुकुल कांगडी के पद पर बने रहते हुए उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय हर्रावाला, देहरादून में कार्यवाहक कुलपति के रूप में कार्य किया गया।
वर्तमान में दिनांक 16.11.2021 से अद्यतन कार्यवाहक निदेशक के रूप में एवं यूनानी सेवाएं उत्तराखण्ड देहरादून के पद के समस्त कार्यों का अनुभव।
निदेशक, आयुर्वेदिक
उक्त कार्यावधि में डॉ० अरूण कुमार त्रिपाठी, कार्यवाहक निदेशक, आयुर्वेदिक एवं यूनानी * सेवायें उत्तराखण्ड का कार्य एवं व्यवहार उत्तम रहा है। यह प्रमाण पत्र निदेशक आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवायें उत्तराखण्ड के पत्र दिनांक 24.04.2023 के क्रम में निर्गत किया जा रहा है।
(डॉ० पंकज कुमार सचिव ।

मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश पहुंचकर चारधाम यात्रा रजिस्ट्रेशन कार्यालय का किया स्थलीय निरीक्षण।

मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश पहुंचकर चारधाम यात्रा रजिस्ट्रेशन कार्यालय का किया स्थलीय निरीक्षण।

मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के दिये निर्देश।

श्रद्धालुओं से लिया व्यवस्थाओं को फीडबैक।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को ऋषिकेश पहुंचकर चारधाम यात्रा रजिस्ट्रेशन कार्यालय एवं श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न क्षेत्रों से आये श्रद्धालुओं से बातचीत कर उनसे व्यवस्थाओं का फीडबैक भी लिया।

मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को आवश्यक मूलभूत सुविधाओं समेत पेयजल, भोजन, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ बनाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाए गए विश्राम स्थल, स्वास्थ्य केन्द्र एवं यात्रा नियंत्रण कक्ष में सभी सुविधाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न होने एवं व्यवस्थित यात्रा के लिए आपसी सामंजस्य से कार्य करने के निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से उत्तराखण्ड आने वाले श्रद्धालुओं की सुगमए सुरक्षित एवं सुविधाजनक चारधाम यात्रा के लिए राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। इस अवसर पर आयुक्त गढ़वाल श्री विनय शंकर पाण्डेय, आईजी श्री के.एस. नगन्याल एवं जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।

एम्स के रेजिडेंस डॉक्टरों ने बृहस्पतिवार की देर शाम हड़ताल समाप्त कर दी है।

एम्स के रेजिडेंस डॉक्टरों ने बृहस्पतिवार की देर शाम हड़ताल समाप्त कर दी है।

लम्बी वार्ता के बाद एम्स प्रशासन द्वारा उनकी मांगों को लिखित रूप से मान लिया गया है।

बृहस्पतिवार को संस्थान के उच्च अधिकारियों के साथ रेजिडेंस डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी वार्ता हुई। इस मामले में बृहस्पतिवार की दोपहर जहां देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा स्वयं एम्स पहुंचकर हड़ताली डॉक्टरों के साथ वार्ता की गयी थी वंही देर शाम तक एम्स अस्पताल प्रशासन भी मामले को सुलझाने में लगा था। इस दौरान एम्स के वरिष्ठ अधिकारियों और हड़ताली रेजिडेंट्स चिकित्सकों के मध्य कई दौर की वार्ता चली। बाद में एम्स प्रशासन द्वारा डॉक्टरों की मांगों को लिखित तौर से मान लिया गया। जानकारी देते हुए संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर मीनू सिंह ने बताया कि रेजिडेंस डॉक्टरों की लगभग सभी मांगे मान ली गई हैं। उन्होंने बताया कि प्रकरण में न्यायालय में जो कैस चलेगा उसका खर्चा संस्थान स्वयं वहन करेगा। इसके अलावा इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हेतु पुलिस द्वारा एसआईटी टीम का गठन कर दिया गया है। बताया कि भविष्य में संस्थान के किसी कर्मचारी के साथ इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए विशेष प्रावधान तैयार किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि जो रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल के दौरान ड्यूटी पर नहीं थे उनके खिलाफ अस्पताल प्रशासन द्वारा कार्यवाही नहीं की जाएगी।

वार्ता के दौरान प्रभारी डीन एकेडमिक प्रोफेसर शैलेंद्र हांडू, चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर संजीव कुमार मित्तल और संस्थान के विधि अधिकारी प्रदीप चंद्र पांडे आदि मौजूद थे।

स्नातक पाठ्यक्रमों के लिये 31 मई तक होंगे ऑॅनलाइन पंजीकरण

स्नातक पाठ्यक्रमों के लिये 31 मई तक होंगे ऑॅनलाइन पंजीकरण

स्टूडेंट फैसिलिटी सेंटर के जरिये छात्र-छात्राओं को मिलेगी मदद

01 जून से मिलेगा प्रवेश व 13 जुलाई से शुरू होगा शैक्षिक सत्र

देहरादून, 22 मई 2024
सूबे के समस्त शासकीय, अशासकीय, निजी महाविद्यालयों एवं राज्य विश्वविद्यालयों में स्नातक प्रथम सेमेस्टर की प्रवेश प्रक्रिया समर्थ पोर्टल के माध्यम से आयोजित की जा रही है। नव प्रवेशित छात्र-छात्राएं आगामी 31 मई तक स्नातक कक्षाओं के लिये ऑनलाइन पंजीकरण कर सकेंगे। इसके उपरांत विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में 01 जून से 20 जून तक प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जायेंगी। जिसमें मेरिट, काउंसलिंग, प्रवेश शुल्क का भुगतान इत्यादि कार्य संपन्न किए जाएंगे। छात्र-छात्राओं को प्रवेश पाने में किसी भी प्रकार की समस्या न हो इसके लिये सभी शिक्षण संस्थानों में स्टूडेंट फैसिलिटी सेंटर स्थापित किये गये हैं।

सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने बताया कि नई शिक्षा नीति-2020 के दृष्टिगत विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल, दून विश्वविद्यालय देहरादून, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोडा एवं श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, टिहरी से संबद्ध समस्त शासकीय, अशासकीय एवं निजी महाविद्यालय व विश्वविद्यालय परिसरों में स्नातक प्रथम सेमेस्टर की प्रवेश प्रक्रिया भारत सरकार द्वारा तैयार समर्थ पोर्टल के माध्यम से आयोजित की जा रही है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिये स्नातक कक्षाओं में प्रवेश हेतु छात्र-छात्राएं आगामी 31 मई 2024 तक ऑनलाइन पंजीकरण कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि पंजीकरण के उपंरात 01 जून से 20 जून 2024 तक विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में मेरिट के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जायेंगी, जबकि 13 जुलाई से शैक्षिक सत्र विधिवत शुरू किया जायेगा। डा. रावत ने बताया कि नव प्रवेशित छात्र-छात्राओं को प्रवेश को लेकर किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिये विभागीय उच्चाधिकारियों को जरूरी निर्देश दे दिये गये हैं साथ ही उन्हें सभी शिक्षण संस्थानों में स्टूडेंट फैसलिटी सेंटर स्थापित करने व समर्थ पोर्टल के व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि राजकीय विश्वविद्यालयों में एकरूपता लाने के उद्देश्य से “एक प्रदेश, एक प्रवेश, एक परीक्षा, एक परिणाम, व एक दीक्षांत“ के तहत समर्थ गवर्नेंस पोर्टल लागू किया गया है। जिसके विगत वर्ष सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद प्रदेश के सभी युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्रदान करना है लिहाजा विभागीय अधिकारियों को स्नातक कक्षाओं में प्रवेश से कोई भी युवा वंचित न रह पाये यह सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभागीय मंत्री के निर्देशों के क्रम में सचिव उच्च शिक्षा शैलेश बगोली ने समस्त राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों एवं निदेशक उच्च शिक्षा को पत्र जारी कर समर्थ पोर्टल का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा है। इसके अलावा उन्होंने पोर्टल का लिंक व क्यूआर कोड को विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों की वेबसाइट पर प्रदर्शित करने, उच्च शिक्षण संस्थानों के निकटस्थ इंटरमीडिएट विद्यालयों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, पूर्व छात्र समूहों, व्यापार मण्डल आदि के माध्यम से भी समर्थ पोर्टल का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा है। स्नातक स्तरीय कक्षाओं में प्रवेश हेतु नव प्रवेशित छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिये सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के परिसरों में स्टूडेंट फैसिलिटी सेंटर अनिवार्य रूप से स्थापित करने को कहा है ताकि छात्र-छात्राओं को पंजीकरण एवं एडमिशन को लेकर कोई दिक्कत न हो।

वी.पी. सिंह बिष्ट
जनसम्पर्क अधिकारी एवं मीडिया प्रभारी
माननीय उच्च शिक्षा मंत्री।

वोट क्यों नहीं दिया? BJP के नोटिस पर जयंत सिन्हा ने दिया जवाब- जरूरी काम से विदेश में हूं, पोस्टल बैलेट से किया था मतदान !

वोट क्यों नहीं दिया? BJP के नोटिस पर जयंत सिन्हा ने दिया जवाब- जरूरी काम से विदेश में हूं, पोस्टल बैलेट से किया था मतदान !

बीजेपी ने जयंत सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब मांगा था. जयंत ने पार्टी की ओर से मिले नोटिस का जवाब दिया है. उन्होंने वोट न देने के

झारखंड की हजारीबाग सीट से निवर्तमान सांसद जयंत सिन्हा को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था. पार्टी की ओर से जारी नोटिस

झारखंड बीजेपी के महामंत्री और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू को संबोधित दो पन्नों के अपने जवाब में जयंत सिन्हा ने नोटिस मिलने पर हैरानी और इसे मीडिया में

जयंत ने जेपी नड्डा से बातचीत के बाद किए गए ट्वीट का जिक्र करते हुए कहा कि इस ऐलान के बाद कई लोग मुझसे मिलने दिल्ली आए और आग्रह किया कि अपने निर्णय

शाहरुख खान अहमदाबाद के हॉस्पिटल में भर्ती, पत्नी गौरी खान भी साथ, मिलने पहुंचीं जूही चावला!

शाहरुख खान अहमदाबाद के हॉस्पिटल में भर्ती, पत्नी गौरी खान भी साथ, मिलने पहुंचीं जूही चावला!
शाहरुख खान को अहमदाबाद के केडी अस्पताल में भर्ती करवाया गया

बॉलीवुड के किंग शाहरुख खान के फैंस के बीच हलचल मची हुई है. खबर है कि शाहरुख को अहमदाबाद के केडी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. जानकारी के मुताबिक, 21 मई को गुजरात के अहमदाबाद स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के बीच IPL 2024 का पहला क्वालिफायर …

पिछले दो दिनों से शाहरुख खान अहमदाबाद में थे. गर्मी ज्यादा होने के चलते उन्हें डीहाइड्रेशन की दिक्कत हुई. मैच के बाद शाहरुख खान मैदान पर काफी देर रहे …

दिल्ली और मुंबई की तरह अहमदाबाद में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंचा है. ऐसे में मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है. सभी को घर पर रहने की सलाह दी गई

मुख्यमंत्री उत्तराखंड के निर्देश, सभी अधिकारी फील्ड पर करे कार्य, का मिलने लगा सकारात्मक परिणाम!

मुख्यमंत्री उत्तराखंड के निर्देश, सभी अधिकारी फील्ड पर करे कार्य, का मिलने लगा सकारात्मक परिणाम!

ऋषिकेश में अस्थाई चेकिंग केंद्र पर एसएसपी के साथ आला अधिकारी कर रहे थे यात्रियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन चैक

*चैकिंग के दौरान चारधाम यात्रा पर हैदराबाद से आये 11 सदस्यीय दल का Online Registration मिला फर्जी

Online Registration में पिछली डेट को फोर्ज करके किया गया था चेंज

दल से पूछताछ के उपरांत दिल्ली की Travel Agency पर हुआ मुकदमा दर्ज

*यात्रियों की यात्रा भी हो पूर्ण, इसके लिए किया गया arrangement

पुलिस- प्रशासन से मिले सहयोग कि लिये पर्यटक दल ने किया धामी सरकार का शुक्रिया

कोतवाली ऋषिकेश

आज दिनांक 21 मई 2024 को ऋषिकेश क्षेत्रान्तर्गत खांड गांव में बनाये गये रजिस्ट्रेशन चैकिंग सेन्टर का एसएसपी देहरादून द्वारा निरीक्षण किया गया, इस दौरान एसएसपी देहरादून द्वारा अधीनस्थ अधिकारियों के साथ चारधाम यात्रा पर आये यात्रियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन चैक करने के दौरान हैदराबाद से चारधाम यात्रा पर आये 11 सदस्यीय यात्रियों के दल के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में कूटरचना कर व तारिखो में हेरफेर किया जाना प्रकाश में आया, जिसके सम्बंध में दल की एक सदस्य मुक्कावली साई भ्रमर मधुरिया, निवासी श्रीनिवासा नगर बैंक कॉलोनी, विजयवाडा आंध्र प्रदेश से जानकारी करने पर उसके द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा चारधाम यात्रा हेतु कुल 11 लोगों का legend India holidays, address 823 jaina tower 2 district centre, Janakpuri Delhi से ऑनलाइन पैकेज बुक किया गया था, जिसके संबंध में उनके द्वारा कंपनी के कर्मचारी कुमकुम वर्मा तथा डायरेक्टर ऋषि राज से फोन के माध्यम से वार्ता की गई थी, जिनके द्वारा उनके 11 सदस्यीय दल का चारधाम यात्रा के लिये रजिस्ट्रेशन एवं ठहरने आदि की व्यवस्था करने का आश्वासन देते हुए उसके एवज में उनसे 02 लाख 33 हजार रूपये लिये गये थे तथा बताया गया था कि चारधाम यात्रा के लिये उन सभी का दिनांक 25 मई 2024 से 30 मई 2024 के बीच का रजिस्ट्रेशन उनके द्वारा कराया जायेगा।

आज उन लोगों को कुमकुम वर्मा द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से रजिस्ट्रेशन की पीडीएफ भेजी गई थी, जिसे लेकर वे सभी चारधाम यात्रा के लिये आज ऋषिकेश आये थे। उक्त यात्रियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन चैक करने पर उनके रजिस्ट्रेशन की वास्तविक दिनांक 01-06-2024 से 10-06-2024 के बीच होनी पायी गई। यात्रियों के साथ हुई धोखधडी के सम्बंध में एसएसपी देहरादून द्वारा तत्काल सम्बन्धित ट्रैवल एजेंसी संचालक के विरूद्व वैधानिक कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये, जिस पर दल की सदस्य मुक्कावली साई भ्रमर मधुरिया, निवासी श्रीनिवासा नगर बैंक कॉलोनी, विजयवाडा आंध्र प्रदेश की ओर से धोखाधडी के सम्बंध में दी गई तहरीर पर कोतवाली ऋषिकेश में सम्बन्धित ट्रैवल एजेंसी के विरुद्ध धारा 420 468, 120 बी भादवि के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है। साथ ही प्रशासन के सहयोग से हैदराबाद से आये दल के चारो धामो के दर्शन हेतु आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित की गई, जिस पर दल के सभी सदस्यों द्वारा पुलिस के मित्रवत व सहयोगात्मक व्यवहार की प्रशांसा करते हुए यात्रा में आने वाले यात्रियों की सुरक्षा हेतु उत्तराखण्ड सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सरहाना करते हुए आभार व्यक्त किया गया।

केदारनाथ धाम में पहुंच रहे श्रद्धालुओं के साथ अतिथि देवो भवः की परम्परा के तहत किया जाए स्वागत ताकि वह अपने साथ उत्तराखंड देवभूमि से सुखद अनुभव लेकर जाएं

जनपद भ्रमण पर पहुंचे सचिव स्वास्थ्य/प्रभारी सचिव यात्रा डाॅ. आर राजेश कुमार ने जनपद की सीमा सिरोहबगड़ से लेकर सोनप्रयाग तक यातायात व्यवस्थाओं सहित विभिन्न विभागों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं का स्थलीय निरीक्षण कर जायजा लिया

केदारनाथ धाम में पहुंच रहे श्रद्धालुओं के साथ अतिथि देवो भवः की परम्परा के तहत किया जाए स्वागत ताकि वह अपने साथ उत्तराखंड देवभूमि से सुखद अनुभव लेकर जाएं

केदारनाथ यात्रा के लिए जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं एवं तैयारियों का यात्रा से जुड़े अधिकारियों के साथ वर्चुअल माध्यम से बैठक कर समीक्षा करते हुए जानकारी प्राप्त की

श्री केदारनाथ धाम में दर्शन करने को पहुंच रहे तीर्थ यात्रियों से ओवर रेटिंग न हो, इसके लिए उन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग को सभी दुकानों, होटल एवं रेस्टोरेंट व ढाबों में अनिवार्य रूप से रेट लिस्ट चस्पा करने के दिए हैं निर्देश

श्री केदारनाथ धाम में हेली के माध्यम से दर्शन करने पहुंच रहे तीर्थ यात्रियों के साथ न हो किसी तरह की जालसाझी एवं धोखाधड़ी, इस पर रखी जाए विशेष निगरानी

प्रभारी सचिव ने तीर्थ यात्रियों से वार्ता कर यात्रा व्यवस्थाओं की जानकारी ली

श्री केदारनाथ धाम में दर्शन करने पहुंच रहे श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम, सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो इसके लिए राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं का जनपद भ्रमण पर पहुंचे सचिव स्वास्थ्य एवं प्रभारी सचिव यात्रा डाॅ. आर राजेश कुमार ने संबंधित अधिकारियों के साथ स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि चारधाम में जो भी श्रद्धालु दर्शन करने आ रहे हैं उन्हें सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों ।मुख्यमंत्री निरंतर प्रयासरत हैं ताकि आने वाले श्रद्धालुओं की चारधाम यात्रा सुगम एवं मंगलमय हो तथा वह अपने साथ उत्तराखंड से सुखद अनुभव लेकर जाएं। इसी उद्देश्य से यात्रा के लिए की जा रही तैयारियों एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है ताकि जिला स्तर पर जो सुविधाएं एवं व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है उसका तत्काल संज्ञान लेते हुए शासन स्तर से उस व्यवस्था एवं सुविधा का तत्काल उपलब्ध कराया जा सके। जिससे कि तीर्थ यात्रियों को कोई असुविधा एवं परेशानी न हो।

श्री केदारनाथ धाम यात्रा को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए यातायात व्यवस्था एवं पार्किंग व्यवस्था का किया जाए उचित प्रबंधन

सिरोहबगड़ से सोनप्रयाग तक विभिन्न यात्रा पडावों का सड़क मार्ग से निरीक्षण करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग को निर्देश दिए हैं कि जो क्षेत्र स्लाडिंग जोन हैं उनमें जेसीबी मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित हो तथा यात्रा मार्ग बाधित होने पर उसे तत्काल आवाजाही हेतु सुचारू किया जा सके। उन्होंने पार्किंग व्यवस्था के लिए कहा कि जिला प्रशासन द्वारा पार्किंग का उचित प्रबंधन किया गया है किंतु भारी संख्या में श्रद्धालुओं के निरंतर आने के कारण जगह-जगह स्थानों पर जाम की स्थिति बनी हुई है इसके लिए उन्होंने केदारनाथ यात्रा पड़ाव सीतापुर, सोनप्रयाग आदि स्थानों में पार्किंग फुल होने पर यातायात को पीछे ही रोका जाए ताकि जाम की स्थिति न होने पाए।

विभिन्न विभागों द्वारा केदारनाथ धाम यात्रा के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्परता से व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के दिए हैं निर्देश

उन्होंने अभिहीत अधिकारी खाद्य सुरक्षा को निर्देश दिए हैं कि केदारनाथ धाम में दर्शन करने पहुंच रहे तीर्थ यात्रियों से ओवर रेटिंग न हो इसके लिए सभी दुकानों, होटलों, रेस्टोरेंट व ढाबों में रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से चस्पा किया जाए। इसके साथ ही खाद्य सामग्री में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए, साथ ही निरंतर चैकिंग की जाए। उन्होंने यात्रा मार्ग में संचालित हो रहे घोड़े-खच्चरों की विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी घोड़े-खच्चर के साथ किसी भी प्रकार से कोई पशु-क्रूरता न हो तथा किसी भी दशा में घोड़े-खच्चरों से डबल चक्कर न लगाए जाएं। इस पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने यात्रा मार्ग से लेकर केदारनाथ धाम तक स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए तथा जो भी शौचालय एवं यात्रा मार्ग में नियमित सफाई व्यवस्था होती रहे जिससे कि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो।

उन्होंने यात्रा मार्ग से लेकर केदारनाथ धाम तक पेयजल व्यवस्था एवं विद्युत व्यवस्था को दुरस्त रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग एवं केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं को पेयजल की कोई समस्या न हो इसके लिए संबंधित विभाग गंभीरता से कार्य करें। उन्होंने विद्युत विभाग को निर्देश दिए हैं कि विद्युत आपूर्ति बाधित होने पर इसका तत्काल जो भी फाॅल्ट विद्युत लाइन पर आता है उसका मरम्मत कार्य शीघ्रता से करते हुए विद्युत आपूर्ति त्वरित सुचारू किया जाए जिससे श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न होने पाए। उन्होंने नोडल अधिकारी हेली को निर्देश दिए हैं कि किसी भी यात्री के साथ कोई धोखाधड़ी एवं जालसाझी न हो इस पर कड़ी निगरानी रखी जाए एवं किसी भी दशा में ओवर रेटिंग श्रद्धालुओं से न हो इसकी निरंतर निगरानी रखने के भी निर्देश दिए गए।

यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए प्रभारी सचिव ने पाया कि जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों द्वारा यात्रा व्यवस्थाओं के लिए की गई तैयारियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जो व्यवस्थाएं की गई हैं वह बेहतर हैं किंतु भारी संख्या में आ रहे श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं को और अधिक सुदृढ करना एक चुनौती है जिसके लिए सभी अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि यात्रा को सुगम एवं सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा सके।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी जीएस खाती ने विभिन्न विभागों द्वारा यात्रा के लिए की गई तैयारियों एवं व्यवस्थाओं की जानकारी से अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि यात्रा को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए सभी अधिकारी निरंतर प्रयासरत हैं तथा दिन-रात व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने में लगे हैं। उन्होंने सचिव को आश्वस्त किया है कि उनके द्वारा जो भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं उनका संबंधित विभागों द्वारा अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।

इस अवसर पर संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डाॅ. अमित शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. एचसीएस मार्तोलिया, उपायुक्त खाद्य गढ़वाल आरएस रावत, जिला पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे, अभिहीत अधिकारी मनोज कुमार सेमवाल, जिला पूर्ति अधिकारी मनोज डोभाल सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य गणेश तिवारी, कनिष्ठ प्रमुख ऊखीमठ शैलेंद्र सिंह कोटवाल, हरीश रावत एवं भूपेंद्र सिंह कोटवाल ने सचिव स्वास्थ्य एवं प्रभारी सचिव से मुलाकात कर यात्रा व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ करने लिए ज्ञापन दिया।

जिला सूचना अधिकारी,
रुद्रप्रयाग।

प्लास्टिक फ्री श्री केदारनाथ की दिशा में बढे कदम, दो प्लास्टिक वेंडिंग मशीन यात्रा मार्ग पर की गई स्थापित!

प्लास्टिक फ्री श्री केदारनाथ की दिशा में बढे कदम, दो प्लास्टिक वेंडिंग मशीन यात्रा मार्ग पर की गई स्थापित!

-एक मशीन गौरीकुंड तो दूसरी केदारनाथ धाम परिसर में लगाई गई

-मशीन में यात्री अपनी क्यूआर कोड वाली बोतल जमा कर दस रुपये कर सकते हैं प्राप्त

प्लास्टिक फ्री श्री केदारनाथ धाम की मुहीम के अंतर्गत जिला प्रशासन ने निजी संस्था के सहयोग से इस बार यात्रा मार्ग पर दो प्लास्टिक वेंडिंग मशीन स्थापित की हैं। एक मशीन गौरीकुंड जबकि दूसरी केदारनाथ धाम परिसर में स्थापित की गई है। इस मशीन में यात्री अपनी क्यूआर कोड वाली बोतल जमा कर दस रुपये रिफंड प्राप्त कर सकते हैं। यह रिफ़ंड डिजिटल माध्यम से यूपीआई के ज़रिये प्राप्त हो सकेगा।

श्री केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग में स्वच्छता बनाने एवं पर्यावरण की दृष्टि से जिला प्रशासन की ओर से अभिनव पहल की गई है। दरसअल, यहां पर यात्रा मार्ग में दो स्थानों पर प्लास्टिक वेंडिंग मशीन स्थापित की गई है। गत वर्ष ट्रायल के रूप में एक मशीन धाम के यात्रा मार्ग पर लगाई गई थी जिसे अब आगे बढ़ाते हुए यात्रा मार्ग पर इस बार दो प्लास्टिक वेंडिंग मशीन लगाई गई हैं। उपजिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल शुक्ला ने बताया कि गौरीकुंड के अलावा केदारनाथ धाम परिसर में यह मशीनें लगाई गई हैं। यह पहल ‘छोटा कदम बड़ा बदलाव’ की थीम पर की जा रही है। यात्रा मार्ग पर स्थापित प्लास्टिक वेंडिंग मशीनों में कोई भी यात्री अपनी क्यूआर कोड वाली बोतल लेकर जा सकता है और इसे मशीन में जमा करने पर दस रुपए यूपीआई में रिफंड हो जाएंगे।